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निवेश विश्लेषण के प्रकार

निवेश विश्लेषण के प्रकार
शेयर बाजार 26 नवंबर 2022 ,15:15

वित्तीय सलाहकार का क्या काम होता है ?

एक वित्तीय सलाहकार (फाइनैंशल एडवाइजर) आपको वित्तीय जोखिम को खत्म करने और लंबी अवधि में वित्तीय लाभ के लिए रणनीति बनाने में मदद करता है। वह आपको बेहतर प्लान दे सकते हैं जो आपको आपके वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही रास्ते निवेश विश्लेषण के प्रकार पर रखता है।

वित्तीय सलाहकार (फाइनैंशल एडवाइजर) विविध पृष्ठभूमि से आते हैं और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करते हैं। इस वजह से, वे भ्रमित करने वाले शब्दजाल को समझाने निवेश विश्लेषण के प्रकार और म्यूचुअल फंड चुनने में आपकी मदद करने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकते हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो वित्तीय सलाहकार आपको हर तरह की वित्तीय योजना (फाइनैंशल प्लानिंग) बनाने में मदद करते हैं। वह आपके आज को संवारने के साथ साथ रिटायरमेंट तक की प्लानिंग में आपकी मदद कर सकते हैं।

फाइनेंशियल एडवाइजर निम्न प्रकार के होते हैंः

  1. निवेश पेशेवर (Investment Professional)
  2. कर पेशेवर (Tax Professional )
  3. धन प्रबंधक (Wealth Manager)
  4. वित्तीय योजनाकार (Financial Planner)

एक वित्तीय सलाहकार क्या करता है?

प्रत्येक प्रकार के वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) अलग-अलग वित्तीय लक्ष्यों तक पहुँचने में आपकी मदद करने के लिए विशिष्ट रूप से योग्य होते हैं।

वित्तीय सलाहकार आपकी अभी की कंडिशन के साथ के आपकी भविष्य की योजनाओं का सही से विश्लेषण करता है। इसके बाद आपकी क्षमता के अनुसार बिना आपको सही निर्णय लेने में मदद करता है। हालांकि फाइनेंशियल एडवाजर की बातों पर आप हमेशा आंख बद करके विश्वास नहीं कर सकते हैं। इसके लिए आपको जरूरी है कि आप उससे सलाह लें और अन्य रिसर्च करके सही निर्णय लें। वित्तीय सलाहकार आपको निम्न बातों की जानकारी दे सकते हैं:

सेवानिवृत्ति योजना (Retirement Planning)

आप रिटायरेंट (Retirement) के बाद अपनी जिंदगी को कैसे देखते हैं? क्या आप दुनिया घूमना चाहते हैं? क्या निवेश विश्लेषण के प्रकार आप अपना खुद का व्यवसाय खोलने के बारें में सोचते हैं? क्या आप अपनी एनजीओ खोल कर लोगों की मदद करना चाहता हैं? कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका सपना क्या है, आपको दो या तीन दशकों या उससे अधिक तक ले जाने के लिए स्थिर आय स्त्रोतों की आवश्यकता है।

एक इनवेस्टमेंट प्रोफेशनल (Investment Professional) की तरह एक वित्तीय सलाहकार आपको न केवल धन बनाने में मदद कर सकता है, बल्कि लंबी अवधि के लिए पैसा कैसे बचा कर रखें यह भी सिखाते हैं। वे आपकी अनुमानित वित्तीय जरूरतों का अनुमान लगा सकते हैं और आपकी रिटायमेंट सेविंग को बढ़ाने के तरीकों की प्लानिंग बना सकते हैं। वह आपको सलाह दे सकते हैं कि आपको वर्तमान में कैसी जगह पैसा लगाएं ताकि आने वाले समय में वह पैसा बढ़े और सुरक्षित भी रहे।

रिटायरमेंट की प्लानिंग लंबी होती है इसलिए ऐसे निवेशों में लंबा समय मिलता है जहां आप रिस्क कम ही रखना चाहें जैसे लंबी अवधि के म्यूच्यूअल फंड्स, एलआईसी, नेशनल बॉंड्स आदि।

निवेश (Investment)

कुछ वित्तीय सलाहकार निवेश पेशेवर यानि इनवेस्टमेंट प्रोफेशनल भी होते हैं। स्मार्टवेस्टर पेशेवरों की तरह, वे आपको यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि आपके लिए कौन से म्यूचुअल फंड या स्टॉक्स या आईपीओ सही हैं और आपको यह दिखा सकते हैं कि अपने निवेश का प्रबंधन और अधिकतम लाभ कैसे उठाएं? वे आपको जोखिमों को समझने में भी मदद कर सकते हैं? एक सफल इनवेस्टमेंट प्रोफेशनल रिस्क के साथ ही बेनेफिट को दिखाता है लेकिन वह जोखिम को भी आपके समक्ष रखता है ताकि आपसे कोई गलती ना हो।

इनवेस्टमेंट प्रोफेशनल आपको आर्थिक जगत की उथल-पुथल से बचाने में मदद करते हैं। वह जानकारी रखते हैं कि कब कौन सा बाजार ऊपर जाएगा कब कौन सा नीचे।

कर योजना (Tax Planning)

हर साल टैक्स को लेकर अगर आप निवेश विश्लेषण के प्रकार भी परेशान रहते हैं तो आपको मदद लेनी चाहिए टैक्स प्लानर्स की। टैक्स एक ऐसी चीज है जो हर कुछ सालों में बदलती रहती हैं और इसे समझने में काफी मशक्त करनी पड़ती है। टैक्स प्लानिंग करने वाले शख्स आपको बताते हैं कि आपको कितना टैक्स भरना है और आप इस टैक्स को कैसे बचा सकते हैं? वह आपके टैक्स को भी आपकी सेविंग बनाने में निपुण होते हैं।

लेकिन ध्यान रखें, आपको कभी भी केवल करों के आधार पर निवेश के निर्णय नहीं लेने चाहिए। कई बार टैक्स सेविंग के चक्कर में हम ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिसका आर्थिक लाभ हमें नहीं मिलता।

संपत्ति विश्लेषक (Estate Planning)

जीवन के अंत की योजना के बारे में बात करना सर्वथा निराशाजनक लग सकता है, लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। चाहे आपने अपना पहला घर खरीदा हो या 30 वर्षों से अपना खुद का व्यवसाय चला रहे हों, आपको यह चुनना होगा कि उन संपत्तियों का क्या करना है जिनके लिए आपने इतनी मेहनत की है।

कल के लिए टालने के लिए यह सामान बहुत महत्वपूर्ण है! अधिकांश लोगों के लिए, एक वसीयत बनाना और जीवन बीमा प्राप्त करना पर्याप्त है- और आप हमेशा समायोजित और अनुकूलित कर सकते हैं क्योंकि आपके जीवन की परिस्थितियां (Circumstances ) बदलती हैं।

लेकिन अगर आपकी स्थिति अधिक जटिल (Complex ) है, तो वित्तीय सलाहकार (विशेष रूप से एक धन प्रबंधक यदि आप लाखों रूपए की संपत्ति का प्रबंधन कर रहे हैं) या संपत्ति नियोजन अनुभव वाले वकील के साथ काम करना जरूरी है। वे आपको यह सुनिश्चित करने के लिए एक योजना बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दे सकते हैं कि आपकी इच्छाओं को पूरा किया जाए। आप उसके साथ आने वाली मन की शांति पर मूल्य टैग नहीं लगा सकते हैं!

स्वास्थ्य और दीर्घकालिक देखभाल योजना (Health and Long Term Care Planning)

एक उम्र के बाद हमारा स्वास्थ्य ही एक ऐसा धन होता है जो बढ़ने की अपेक्षा कम हो सकता है। इसलिए हेल्थ प्लानिंग और आने वाले समय में बीमारियों पर होने वाले खर्च के लिए धन अर्जित करना एक चुनौती होती है। इस चुनौती के लिए हेल्थ या लॉन्ग टर्म केयर प्लानर आपकी मदद करते हैं।

बुढ़ापे में आप अपने खर्चों की तैयारी के लिए आप क्या कर सकते हैं? एक वित्तीय सलाहकार या बीमा एजेंट (insurance agent ) दीर्घकालिक देखभाल बीमा के लिए आपको सुझाव दे सकता है। फिर आप निवेश विश्लेषण के प्रकार एक ऐसी योजना चुन सकते हैं जो अभी और भविष्य में सस्ती हो, जब आपको इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होगी।

फाइनेंसियल एडवाइजर को चुनते हुए आपको निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिएः

  • उसका पोर्टफोलिया बेहतर और मजबूत हो।
  • उसे मार्केट की समझ हो।
  • विश्वसनीय हो और आपके पास उसकी पूरी जानकारी हो।
  • उसका रिकोर्ड बेहतर हो।

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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

"एफ.डी.आई. भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, साथ ही वित्तीय स्थिरता, विकास और संवृद्धि की एक निश्चित अवस्था प्राप्त करने में भी मदद करता है।" इस वक्तव्य के संदर्भ में विभिन्न सरकारी पहलों की चर्चा कीजिये।

उत्तर :निवेश विश्लेषण के प्रकार

उत्तर की रूपरेखा:

  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से उत्पन्न प्रमुख लाभ और लाभान्वित हुए प्रमुख क्षेत्रों की चर्चा।
  • प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के क्षेत्र में सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों की चर्चा करें।
  • निष्कर्ष।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के बढ़ने से भारत के आर्थिक विकास को बल मिला है। इस संदर्भ में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • पूंजी प्रवाह में वृद्धि
  • बेहतर प्रौद्योगिकी
  • प्रबंधन विशेषज्ञता
  • अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से लाभान्वित हुए प्रमुख क्षेत्र हैं:

  • वित्तीय क्षेत्र (बैंकिंग और गैर बैंकिंग)
  • बीमा
  • दूरसंचार
  • आतिथ्य और पर्यटन
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • सॉफ्टवेयर और सूचना प्रौद्योगिकी इत्यादि।

सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को देश में लाने की काफी सुलभ व्यवस्था की है जिसके अंतर्गत ऑटोमेटिक मार्ग से अधिकतर क्षेत्रों/गतिविधियों में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है।

आर्थिक वृद्धि और विकास के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के महत्त्व को देखते हुए सरकार ने रक्षा तथा रेलवे क्षेत्र में प्रमुख प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुधारों की घोषणा की। रेल क्षेत्र में ऑटोमेटिक मार्ग से रेल अवसंरचनाओं के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सौ प्रतिशत किया गया और रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 49 प्रतिशत की गई।

सरकार ने अवसंरचना निर्माण को बढ़ावा देने तथा नीति में व्यावहारिकता लाने के लिये निर्माण विकास के क्षेत्र में भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति की समीक्षा की और इसमें निकास के तौर-तरीकों को आसान बनाया गया। क्षेत्रीय प्रतिबंधों को तर्कसंगत बनाया गया और लोगों द्वारा वहन करने योग्य मकानों को बनाने पर बल दिया गया।

चिकित्सा उपकरण के क्षेत्र पर बल देने के लिये फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को ऑटोमेटिक मार्ग से 100 प्रतिशत कर दिया गया।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तहत सरकार ने अनुसूचित (नियमित समय-सारिणी पर चलने वाली) हवाई परिवहन सेवाओं - नियमित समय सारिणी के अनुसार परिचालित यात्री-सेवा एयरलाइनों तथा क्षेत्रीय निवेश विश्लेषण के प्रकार हवाई परिवहन सेवा में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी है।

पेंशन क्षेत्र में भी इसी सीमा तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश खोल दिया गया है। एनआरआई निवेश के संबंध में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को स्पष्ट किया गया है। इसके तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की नीति के उद्देश्यों के लिये अपने देश न भेजे जाने के आधार पर एनआरआई निवेश को फेमा की अनुसूची 4 (भारत के बाहर के निवासी द्वारा सिक्योरिटी ट्रांसफर या जारी करना) के अंतर्गत नियम बनाकर एनआरआई निवेशकों के निवेश को भारत के निवासियों द्वारा किये जाने वाले निवेश के बराबर घरेलू निवेश के रूप में समझा जाएगा।

इस प्रकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति व्यवस्था में समय-समय पर परिवर्तन किये गए हैं ताकि भारत आकर्षक निवेश स्थल और निवेशक सहज बना रहे। इन कदमों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ने की आशा है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घरेलू निवेश का पूरक है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से घरेलू कम्पनियों को लाभ होता है, कम्पनियां पूरक पूंजी प्राप्त कर सकती हैं, अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकती हैं, उन्हें विश्वस्तरीय प्रबंधकीय व्यवहारों से जुड़ने का मौका मिलता है और विश्व बाज़ार के साथ जुड़ने का अवसर भी प्राप्त होता है। इससे देश की घरेलू वृद्धि में तेज़ी आती है।

निवेश से ज्‍यादा मुनाफा कमाने और रिस्‍क को कम करने में मददगार है पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन, यह चेकलिस्ट कर सकता है आपकी मदद

Investment Portfolio Diversification पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन निवेश में उपयोग की जाने वाली रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) की एक रणनीति है निवेश विश्लेषण के प्रकार जो आपको अपने फंड को कई प्रकार की संपत्ति में आवंटित करके जोखिम को कम करने में मदद करती है

नई दिल्‍ली, वैभव अग्रवाल। शेयर बाजार की अस्थिर प्रकृति निवेश को एक जोखिम भरा मामला बनाती है, और इसकी महत्वपूर्ण काउंटरबॅलेन्स स्ट्रैटेजी में से एक है पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन। क्या आपका पोर्टफोलियो डायवर्सिफाइड है? तो, ये रही आपकी गो-टू चेकलिस्ट!

पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन क्या है?

पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन निवेश में उपयोग की जाने वाली रिस्क मैनेजमेंट की एक रणनीति है, जो आपको अपने फंड को कई प्रकार की संपत्ति में आवंटित करके जोखिम को कम करने में मदद करती है। यह सुनिश्चित करता है कि आपकी संपत्ति उच्च जोखिम के संपर्क में न आएं, लेकिन उसी समय में पर्याप्त उच्च रिटर्न उत्पन्न करती है।

डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के घटक

एक अच्छी तरह से डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के प्राथमिक घटकों में शामिल हैं: बॉन्ड, स्टॉक और म्युचुअल फंड।

  • स्टॉक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनियों के शेयर्स हैं, और इनमें लंबे समय के लिए निवेश कर आप अपनी संपत्ति बढ़ा सकते हैं।
  • बॉन्ड कॉरपोरेट और गवर्मेंट डेट इंस्ट्रूमेंट्स हैं, जहां अस्थिरता कम होती है, लेकिन रिटर्न्स भी उतने ही कम होते हैं।
  • म्यूचुअल फंड्स इक्विटी से जुड़े जोखिम को कम करते हैं और स्थिर रिटर्न्स भी दे सकते हैं।

लघु अवधि के निवेश

कम जोखिम वाली संपत्ति के कुछ उदाहरण ट्रेजरी बिल, डिपॉज़िट प्रमाणपत्र और कमर्शियल पेपर्स हैं। वे स्थिरता प्रदान करते हैं और मौद्रिक पहुंच को आसान बनाते हैं। हालांकि, इनमें उच्च-सुरक्षा स्तरों के मुकाबले तुलनात्मक रूप से कम रिटर्न्स है।

कमोडिटीज़

आप अपने पोर्टफोलियो में गेहूं, मक्का, धातु या यहां तक कि तेल जैसी वस्तुओं को शामिल कर सकते हैं। हालांकि, यह एक जोखिम भरा परिसंपत्ति वर्ग है जो देश की अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों और व्यापार परिदृश्यों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।

विदेशी संपत्ति

विदेशी निवेश साधन आपको अपने समग्र पोर्टफोलियो पर उच्च रिटर्न्स उत्पन्न करने में मदद करते हैं क्योंकि उनका डोमेस्टिक सिक्योरिटीज़ के साथ लोअर को-रिलेशन होता है। विदेशी शेयरों और सिक्योरिटीज़ में निवेश करने से पहले आपको अपनी जोखिम उठाने की क्षमता का विश्लेषण करना चाहिए।

रियल एस्टेट फंड्स

इसमें प्रॉपर्टी, बिल्डिंग और प्लॉट में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष निवेश शामिल हैं। रियल एस्टेट आपके पोर्टफोलियो को मुद्रास्फीति के खिलाफ कुछ सुरक्षा प्रदान कर सकता है। अन्य संपत्तियों के विपरीत, जैसे कि भैतिक शेयर्स, रियल एस्टेट एक भौतिक रूप में मौजूद होती है।

सेक्टर फंड्स

यदि आपका निवेश लक्ष्य विभिन्न आर्थिक चक्र चरणों का लाभ उठाना है तो सेक्टर फंड्स में सेक्टोरल फोकस शामिल हैं और फायदेमंद हैं। ये क्षेत्र संचार सेवाएं, ऊर्जा, स्वास्थ्य देखभाल, प्रौद्योगिकी, कंस्यूमर स्टेपल्स, आदि हो सकते हैं।

पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के लाभ

  • यह आपके पोर्टफोलियो को शॉक से बचता है।
  • यह विभिन्न क्षेत्रों में रिटर्न्स के अवसर पैदा करता है।
  • यह आपको रिस्क कम करने में मदद करता है।
  • पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन के नुकसान
  • अपने पोर्टफोलियो में अधिक विविधता लाने से औसत से कम रिटर्न्स मिल सकता है।
  • रिसर्च करना और उनके परफॉर्मेंस पर नज़र रखना एक समय लेने वाला मामला है।
  • मल्टिपल स्टॉक्स के साथ, आपको अधिक ट्रांसैक्शन शुल्क भी देना होगा। यह आपके निवेश की कुल लागत को बढ़ा सकता है।
  • कर संरचना सभी परिसंपत्ति वर्गों में समान नहीं होती है, जो जटिलताएं पैदा करता है यदि आपने कई खंडों में उद्यम किया है तो।

अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अब जब आप पोर्टफोलियो विविधीकरण के सभी फायदे और नुकसान जानते हैं, तो आइए पोर्टफोलियो विविधीकरण में जाने से पहले जिन बातों का ध्यान रखना चाहिए उस पर गौर करते हैं।

अपने रिस्क को कम करें

अपने पोर्टफोलियो को एसेट क्लासेस में फैलाएं। हालांकि, ऐसा करने से पहले प्रत्येक उपकरण और योजना पर अच्छी तरह से रिसर्च करें। यदि आपको लगता है कि अपने पोर्टफोलियो का प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण है, तो किसी प्रमाणित पेशेवर से संपर्क करें जो आपको इस पर मार्गदर्शन कर सकें।

अपने लक्ष्यों को समझें

अपने निवेश के उद्देश्य को समझने से यह सुनिश्चित होगा कि आपका पैसा सही जगह पर है और आप अत्यधिक जोखिम में नहीं हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप आपके शॉर्ट-टर्म गोल्स के लिए इक्विटी फंड्स में पैसा निवेश कर रहे हैं , तो आपको समस्या हो सकती है क्योंकि इक्विटी फंड्स लॉन्ग टर्म में सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हैं और आपको उच्च रिटर्न्स देते हैं।

निष्‍कर्ष

जब आप बाजार और संपत्ति के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ हो जाते हैं तो निवेश तब फायदेमंद होता है जब आप विकल्पों को बेहतर समझते हैं। भले ही पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन आपकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक स्मार्ट विकल्प है, लेकिन अधिक डायवर्सिफिकेशन से औसत से कम रिटर्न्स मिल सकता है। जटिल उपकरणों और मामूली रिटर्न्स न मिल पाएं इसलिए आपको अति-विविधीकरण और इष्टतम विविधीकरण के बीच की पतली रेखा को याद रखने की आवश्यकता है।

(लेखक तेजी मंदी के संस्‍थापक हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

अमेरिकन कंपनियां यूपी में नौ सेक्टरों में करेंगी निवेश

शेयर बाजार 26 नवंबर 2022 ,15:15

अमेरिकन कंपनियां यूपी में नौ सेक्टरों में करेंगी निवेश

© Reuters. अमेरिकन कंपनियां यूपी में नौ सेक्टरों में करेंगी निवेश

में स्थिति को सफलतापूर्वक जोड़ा गया:

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लखनऊ, 26 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट के लिए अमेरिकी कंपनियों में उत्सुकता बढ़ने लगी है। राज्य के 9 सेक्टर ऐसे हैं, जहां अमेरिकी कंपनियों की दिलचस्पी ज्यादा है। इसमें आईटी से लेकर कृषि उद्योग तक अमेरिकी कंपनियों के टॉप चार्ट में हैं। जीआईएस-2023 की नोडल एजेंसी इन्वेस्ट यूपी के मुताबिक प्रदेश में भारी निवेश के लिए अमेरिकी कंपनियों पर विशेष फोकस है। सरकार बड़ी संख्या में अमेरिकी कंपनियों को यूपीजीआईएस 2023 के लिए निमंत्रण भेज चुकी है। इसके अलावा अमेरिका के विभिन्न व्यापारिक संगठनों से भी सरकार के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं, जहां से काफी उत्साहवर्धक रिस्पॉन्स मिले हैं।

सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार अमेरिकी कंपनियों की ओर से जिन सेक्टर्स में विशेष रुचि दिखाई गयी है उनमें आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा और एयरोस्पेस, फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण, ऊर्जा, रिटेल और ऑटोमोबाइल। इसके अलावा बड़ी संख्या में वेंचर कैपिटलिस्ट भी यूपी में निवेश को इच्छुक हैं। यूपी में सर्वाधिक 90 लाख से भी ज्यादा एमएसएमई क्लस्टर हैं, जहां निवेश के लिए अमेरिकन वेंचर कैपिटलिस्ट्स के साथ सरकार के स्तर से लगातार संपर्क साधा जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि प्रदेश के स्टार्टअप्स में अमेरिकी निवेशकों की हिस्सेदारी होने से यूपी में यूनिकॉर्न की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होगी। साथ ही राज्य से मेधा के पलायन को रोकने में भी काफी मदद मिलेगी।

इनमें एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट (NASDAQ: MSFT ) कॉपोर्रेशन, अल्फाबेट (NASDAQ: GOOGL ) (गूगल), अमेजॉन, मेटा, वीजा, इंटेल, सिस्को, ऑरेकल और अडोबी शामिल हैं। इसमें आर्चर डेनियल्स मिडलैंड (एडीएम), सिजेन्टा, ब्यूरो वेरिटाज, कोटेर्वा एग्रीसाइंस, न्यूट्रीन, इंडिगो और पॉयनियर, बीएई सिस्टम, सफरॉन एसए, रायथॉन, नॉथ्रेप ग्रुम्मैन, जीई एविएशन, जनरल डायनेमिक्स कॉपोर्रेशन, लॉकहीड मार्टिन कॉपोर्रेशन, यूनाइटेड टेक्नोलॉजी कॉपोर्रेशन (यूटीसी), एयरबस एसई, द बोइंग कंपनी,ं जॉनसन एंड जॉनसन, फाइजर इंक, मर्क एंड कंपनी, ऐबवाई इंक, ब्रिस्टल मेयर्स स्क्वीब, एब्बोट लैबोरेटरीज, ऐमगन, गिलीड साइंसेज, एली लिली एंड कंपनी, एक्सन मोबिल कॉपोर्रेशन, शेवर्न कॉपोर्रेशन, नेक्स्ट्रा इनर्जी, जनरल इलेक्ट्रिक, कॉन्को फिलिप्स, डोमिनियन इनर्जी, ड्यूक इनर्जी कॉपोर्रेशन, द सदर्न, डीसीएम वेंचर, ग्रेलॉक पार्टनर, इनसाइट वेंचर पार्टनर और यूनियन स्क्वायर वेंचर, वालमार्ट, अमेजॉन, कोस्टो होलसेल और द होम डीपो, जनरल मोटर्स, फोर्ड मोटर, बीएमडब्ल्यू, फॉक्सवैगन, टेस्ला (NASDAQ: TSLA ), डीरे एंड कंपनी, पेसकार इंक और निसान मोटर्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इसके अलावाा यूएस स्माल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एसबीए), नेशनल विमेन बिजनेस काउंसिल, स्कोर बिजनेस मेंटरिंग, वेटरन्स बिजनेस आउटरीच सेंटर (वीबीओसी), इसके अलावा यूएस चेंबर ऑफ कॉमर्स स्माल बिजनेस काउंसिल, यूएस एक्सपोर्ट असिस्टेंस सेंटर, यूनाइटेड स्टेट माइनॉरिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स, आं˜प्रेन्योर ऑर्गनाइजेशन, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट बिजनेस (एनएफआईबी), इंटरनेशनल फ्रेंचाइजीस एसोसिएशन (आईएफए), नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन, नेशनल रिटेल फेडरेशन, अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन (एएमए), यूनाइटेड स्टेट टेलिकॉम एसोसिएशन भी दिलचस्पी दिखा रही हैं।

अमेरिकी कंपनियों के उत्तरप्रदेश में निवेश के लिए सरकार ने अफसरों की लंबी चौड़ी टीम को काम पर लगा दिया है। इनमें सचिव स्तर से ऊपर के दो अफसर, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वास्थ्य विभाग के दो अधिकारी, योजना विभाग से एक अधिकारी, उद्योग विभाग से एक अधिकारी को लगाया गया है। इसके अलावा निवेश विश्लेषण के प्रकार सीएम कार्यालय से एक अधिकारी व इन्वेस्ट यूपी के तीन अधिकारियों को अमेरिकी कंपनियों से डील फाइनल करने के काम में मिशन मोड में कार्य करने के लिए कहा गया है।

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