ट्रेडिंग विचार

मुख्य व्यापारिक स्थिति

मुख्य व्यापारिक स्थिति

भारत में अपराध

राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा निकाले जाने वाला यह सबसे पुराना एवं प्रतिष्ठित प्रकाशन है । रिपोर्ट के लिए राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो (रा.अ.रि.ब्‍यू.) द्वारा जिला अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो(जि.अ.रि.ब्‍यू.) से डाटा संग्रह किया जाता है एवं संदर्भ के अंतर्गत वर्ष के अंत में राष्‍ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो को भेजा जाता है । बड़े शहरो (अंतिम जनगणना के आधार पर १० लाख या उससे अधिक जनसंख्‍या वाले शहरो) से अलग से डाटा संग्रह किया जाता है । कुछ आई.पी.सी. मदों पर जिला वार अलग से डाटा संग्रह एवं प्रकाशित किया जाता है । 'भारत में अपराध' का पहला अंक वर्ष १९५३ सें संबंधित है एवं रिपोर्ट का नवीनतम अंक वर्ष 2021 से मुख्य व्यापारिक स्थिति संबंधित है ।

कार्य क्षेत्र::

यह रिपोर्ट निम्‍नलिखित पर विस्‍तृत जानकारी रखती है:

  • पंजीकृत मामले एवं उनका निपटान एवं
  • गिरफ्तार व्‍यक्ति एवं उनका निपटान

भारतीय दंड संहिता एवं विशेष तथा स्‍थानीय कानून के मुख्‍य मदों के अंतर्गत । रिपोर्ट में इन अपराध शीर्षों के अंतर्गत गिरफ्तार व्‍यक्तियों का आयु ग्रुप वार एवं लिंग वार ब्‍यौरा भी उपलब्‍ध है । इस रिपोर्ट में समाज के कुछ असुरिक्षत सेक्शनों-महिलाओं,बच्चों,अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध हुए अपराध पर भी एक अध्‍याय है । उपर्युक्‍त अपराध आकडों को सुचित्र/नक्शे के प्रारूप, सारणी के प्रारूप एवं मानचित्र के प्रारूप में प्रस्‍तुत किया गया है ।

मुख्‍य क्षेत्र:

पुलिस सामर्थ्य, व्‍यय एवं अवसंरचना के लिए एक पूर्ण अध्‍याय समर्पित किया गया है । इसी प्रकार से पुलिस दुर्घटना एवं पुलिस गोलीबारी एवं दुर्घटना पर सूचना अलग अध्‍यायों में दी गई है । समय के अनुसार आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है। अतः साईबर अपराध एवं मानव व्यापार पर सूचना को अलग अध्‍यायों में दिया गया है । आर्थिक अपराध, दोबारा अपराध करने के अभ्‍यास एवं रेलवे में अपराध को अलग अध्‍यायों में दिया गया है । अपहरण एवं व्यपहरण की कुल जनसंख्‍या के संबंध में महिलायें एवं लड़कियों तथा बच्‍चों की सूचना अलग से दी गई है ।

डाटा अनुसंधान करने एवं निर्णय लेने में:

भारत सरकार के पास उपर्युक्‍त विषय पर अत्‍यंत विस्‍तृत, डाटा बैंक केवल इसी रिपोर्ट में उपलब्‍ध है। इस रिपोर्ट में विहित डाटा नीति निर्माताओं, एन.जी.ओ., अनुसंधानकर्त्‍ताओं एवं आम जनाता द्वारा बड़े तौर प्रयोग किया जाता है । रिपोर्ट में विहित सूचना की व्यापकता, बढ़ते उपयोग, विभिन्‍न स्‍टाकहोल्‍डर की निर्भरता को ध्‍यान में रखते हुए हमने, अपने खुद के प्रयासों से 1953 से 2020 तक की रिपोर्ट के सभी अंकों को डिजिटाईज किया है एवं इसे हमारी वेबसाइट पर उपलब्‍ध कराया है ।

सुझाव एवं नए क्रियाकलाप:

यद्यपि हमारी उपल्बिधयां हमें गौरवांवित करती है, परन्तु वे हमें संतुष्‍ट नहीं करती है । रिपोर्ट के प्रस्‍तुतीकरण में कई वर्षों से लगातार सुधार होता रहा है । अतः अभी हाल ही में रिपोर्ट में रेखाचित्र एवं मानचित्र की काफी अधिक संख्‍या को शामिल किया गया है । हम स्‍टेकहोल्‍डर के लिए इसे अधिक उपयोगी बनाने के लिए रिपोर्ट की विषय सूची एवं प्रस्‍तुतीकरण में सुधार के लिए अत्‍यंत आभारी होंगे । हम उपयोगकर्त्‍ताओं से हमारे कार्य को और अधिक उत्‍कृष्‍ट बनाने के लिए सुझावो का स्‍वागत करते हैं ।.

कब मनाई जाएगी गुरु नानक? जानिए क्या थे गुरु नानक देव जी के 3 मुख्य संदेश

इस साल 8 नवंबर को गुरु नानक जयंती मनाई जाएगी।स पर्व को सिख समुदाय के लोग बेहद हर्ष और उल्लास कर साथ मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी का जीवन प्रेम और ज्ञान से भरा हुआ था।

कब मनाई जाएगी गुरु नानक? जानिए क्या थे गुरु नानक देव जी के 3 मुख्य संदेश

देश में हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिख समुदाय के पहले धर्मगुरु श्री गुरु नानक देव जी की जयंती मनाई जाती है इसे गुरु पर्व या प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है। इस पर्व को सिख समुदाय के लोग बेहद हर्ष और उल्लास कर साथ मनाते हैं। गुरु नानक देव जी का जीवनभर प्रेम और ज्ञान का संदेश दिया। इस साल 8 नवंबर को गुरु नानक जयंती मनाई जाएगी।

सिखों के पहले गुरु नानक देव जी का जन्म सन् 1469 पंजाब प्रांत के तलवंडी में हुआ था। जो फिलहाल पाकिस्तान में स्थित है। जिन्होंने दुनिया को सेवा, सहयोग व श्रद्धा की शिक्षा दी। गुरु नानक देव की जयंती को पूरे देश में प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

गुरु नानक देव की जयंती के दिन मनाया जाने वाला प्रकाश पर्व सिख समुदाय का सबसे बड़ा पर्व है। हर साल दीपावाली के ठीक 15 दिन बाद देश में पूरे जोश और उत्साह के साथ गुरु मुख्य व्यापारिक स्थिति मुख्य व्यापारिक स्थिति नानक देव की जयंती मनाई जाती है। गुरुनानक देव की जयंती के यह पर्व पूरे देश में एकता और प्यार का संदेश देता है और मानवता को एक सूत्र में बांधने का काम करता है।

गुरु नानक देव जी के तीन मुख्य संदेश थे। पहला अपना काम पूरी मेहनत से करो। गुरु का नाम जपो और जो तुम कमाकर धन अर्जित कर रहे हो उसे लोगों के साथ बांट कर आगे बढ़ते रहो इसीलिए गुरु नानक जयंती के दिन जगह-जगह लंगर लगाए जाते हैं और भारी संख्या में लोग गुरु प्रसाद ग्रहण करते हैं।

जिले के बारे में

मीरजापुर भारत के उत्तर प्रदेश में एक शहर है, दिल्ली और कोलकाता दोनों से लगभग 650 किमी, इलाहाबाद से लगभग 87 किलोमीटर और वाराणसी से 67 किलोमीटर दूर है। इसकी 2,496,970 की आबादी है, जिसमें से पुरुष और महिला क्रमशः 1,312,302 और 1,184,668 थीं (माध्यम-जनगणना2011)। यह अपने कालीनों और ब्रासवेयर उद्योगों के लिए जाना जाता है। शहर कई पहाड़ियों से घिरा हुआ है और मीरजापुर जिले का मुख्यालय है और यह विंध्याचल, अष्टभुजा और काली खोह के पवित्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है और यहां तक ​​कि देवरहवा बाबा आश्रम भी है। इसमें कई झरने और प्राकृतिक स्पॉट हैं यह सोनभद्र के विभाजन से पहले एक बार उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला था कुछ सिनेमा-हॉल हैं। पहले देखो शहर शहर, गांव और शहर के जीवन का संगम प्रतीत होता है। शहर की स्थापना से पहले, यह क्षेत्र घने जंगल था और वाराणसी (ए.के.ए.-बन्नारस), सकटेशगढ़, विजयगढ़, नैनागढ़ (चुनार), नौगढ़, कांतिट और रीवा के शिकारों जैसे विभिन्न राज्यों द्वारा स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया गया था। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने मध्य और पश्चिमी भारत के मध्य व्यापार केंद्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र की स्थापना की थी। इस बार रीवा केंद्रीय भारत की एक सुस्थापित राज्य थी और ग्रेट डेक्कन रोड द्वारा सीधे मीरजापुर से जुड़ा हुआ था। जब तक मीरजापुर मध्य भारत का एक प्रसिद्ध व्यापार केंद्र बन गया था और बहुत बड़े पैमाने पर कपास, और रेशम का व्यापार शुरू किया था। ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस जगह को मीरजापुर (मीरजापुर) नाम दिया है। मीरजापुर शब्द ‘मिर्जा’ से लिया गया है जो बदले में फारसी शब्द ‘ट्रिप कलचू’ से लिया गया है जिसका अर्थ है “अमीर” या “शासक का बच्चा” का बच्चा। फारस में ‘अमीनराज’ में अरबी का शीर्षक ‘अमीर (अंग्रेजी’ अमीर ‘) होता है, जिसका अर्थ है “कमांडर”, और फारसी प्रत्यय -जाद, जिसका अर्थ है “जन्म” या “वंश”। तुर्क भाषा में स्वर सद्भाव के कारण, वैकल्पिक उच्चारण मोर्ज़ा (फारसी शब्द से व्युत्पन्न बहुवचन शब्द) भी उपयोग किया जाता है। शब्द 15 9 5 में फ्रेंच एमीर से अंग्रेजी में प्रवेश किया था। मीरजापुर का अर्थ राजा का स्थान है।

लगातार दूसरे साल भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बना अमेरिका

अमेरिका-भारत

अमेरिका लगातार दूसरे साल 2019-20 में भी भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बना रहा, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 88.75 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2018-19 में 87.96 अरब डॉलर था।

17.42 अरब डॉलर रहा व्यापार अंतर
अमेरिका उन चुनिंदा देशों में एक है, जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष है। आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में दोनों देशों के बीच व्यापार अंतर बढ़कर 17.42 अरब डॉलर भारत के पक्ष में रहा। 2018-19 में अधिशेष 16.86 अरब डॉलर था। अमेरिका 2018-19 में चीन को पीछे छोड़कर भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार बन गया था।

भारत और चीन के बीच घटा द्विपक्षीय व्यापार
भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2019-20 में घटकर 81.87 अरब डॉलर रह गया, जो 2018-19 में 87.08 अरब डॉलर था। दोनों देशों के बीच व्यापार अंतर भी 53.57 अरब डॉलर से घटकर 48.66 अरब डॉलर रह गया। आंकड़ों के मुताबिक, चीन 2013-14 से 2017-18 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। चीन से पहले, यूएई देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिया बयान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, 'विश्व का आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल है, चीन से निपटने के लिए दुनिया बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं है। इसलिए यह भारतीय उद्योगों के लिए बहुत अच्छा अवसर है। हम अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं और स्थिति का लाभ उठा सकते हैं। विश्व बैंक ने पहले ही कारोबारी सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में भारत की रैंक बढ़ा दी है लेकिन क्लीयरेंस, सर्टिफिकेट और कंप्लायंस की प्रक्रियाएं बहुत जटिल हैं। हम सभी को डिजिटलाइज बनाने की कोशिश कर रहे हैं।'

आयात पर निर्भरता कम की जाए- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जानकारों का मानना है कि इस समय भारत को जो दो महत्वपूर्ण काम करने हैं, उसमें चीन पर आर्थिक दबाव डालना और खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर आगे बढ़ना है। हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात के प्रसारण में आत्मनिर्भर भारत बनने की बात कही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में बनने वाली वस्तुओं को बढ़ावा दिया जाए और दूसरे देशों से आयात पर निर्भरता कम की जाए।

जैसे-जैसे भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़ता गया, वैसे ही चीन की भारत में हिस्सेदारी भी बढ़ती गई। साल 2001-2002 में दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार महज तीन अरब डॉलर का था जो 2018-19 में बढ़कर 87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आयात-निर्यात के गणित को समझें तो भारत ने चीन से करीब 70 अरब डॉलर का आयात किया, वहीं चीन को करीब 17 अरब डॉलर का निर्यात किया।

अमेरिका लगातार दूसरे साल 2019-20 में भी भारत का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार बना रहा, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2019-20 में अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 88.75 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो 2018-19 में 87.96 अरब डॉलर था।

17.42 अरब डॉलर रहा व्यापार अंतर
अमेरिका उन चुनिंदा देशों में एक है, जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष है। आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में दोनों देशों के बीच व्यापार अंतर बढ़कर 17.42 अरब डॉलर भारत के पक्ष में रहा। 2018-19 में अधिशेष 16.86 अरब डॉलर था। अमेरिका 2018-19 में चीन को पीछे छोड़कर भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार बन गया था।

भारत और चीन के बीच घटा द्विपक्षीय व्यापार
भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2019-20 में घटकर 81.87 अरब डॉलर रह गया, जो 2018-19 में 87.08 अरब डॉलर था। दोनों देशों के बीच व्यापार अंतर भी 53.57 अरब डॉलर से घटकर 48.66 अरब डॉलर रह गया। आंकड़ों के मुताबिक, चीन 2013-14 से 2017-18 तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। चीन से पहले, यूएई देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिया बयान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, 'विश्व का आर्थिक परिदृश्य बहुत अनुकूल है, चीन से निपटने के लिए दुनिया बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं है। इसलिए यह भारतीय उद्योगों के लिए बहुत अच्छा अवसर है। हम अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं और स्थिति का लाभ उठा सकते हैं। विश्व बैंक ने पहले ही कारोबारी सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) में भारत की रैंक बढ़ा दी है लेकिन क्लीयरेंस, सर्टिफिकेट और कंप्लायंस की प्रक्रियाएं बहुत जटिल हैं। हम सभी को डिजिटलाइज बनाने की कोशिश कर रहे हैं।'

आयात पर निर्भरता कम की जाए- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जानकारों का मानना है कि इस समय भारत को जो दो महत्वपूर्ण काम करने हैं, उसमें चीन पर आर्थिक मुख्य व्यापारिक स्थिति दबाव डालना और खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर आगे बढ़ना है। हाल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात के प्रसारण में आत्मनिर्भर भारत बनने की बात कही थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में बनने वाली वस्तुओं को बढ़ावा दिया जाए और दूसरे देशों से आयात पर निर्भरता कम की जाए।

जैसे-जैसे भारत और चीन के बीच व्यापार बढ़ता गया, वैसे ही चीन की भारत में हिस्सेदारी भी बढ़ती गई। साल 2001-2002 में दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार महज तीन अरब डॉलर का था जो 2018-19 में बढ़कर 87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आयात-निर्यात के गणित को समझें तो भारत ने चीन से करीब 70 अरब डॉलर का आयात किया, वहीं चीन को करीब 17 अरब डॉलर का निर्यात किया।

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